अच्छे पेरेंट्स कैसे बने ?

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एक छोटा सा सवाल – कि बच्चों को सभी प्रकार की खुशिया देने के बावजूद भी क्या हमारी परवरिश सही हैं ? सही परवरिश करने या उसे और बेहतर बनाने की जिज्ञासा हर पैरेंट्स के मन मे होती हैं । बच्चों को सिर्फ छोटे से बड़े करना ही अच्छी परवरिश नहीं हैं बहुत सी ऐसी बाते हैं जिनका ख्याल हमे रखना होता हैं क्योंकि आज की पीढ़ी बहुत ही संवेदनशील हैं । हर एक छोटी सी बात उनके दिमाग मे घर कर लेती हैं । बेहतर परवरिश निम्न प्रकार से कर सकते हैं –

  1. आज की परवरिश पहले से काफी अलग हैं | पहले के समय मे पेरेंट्स बच्चों की सामान्य बातों जैसे – बच्चों ने क्या खाया , क्या पहना, परीक्षा मे अच्छे नम्बर आए या नहीं की परवाह नहीं करते थे लेकिन इसका मतलब ये नहीं की वे गैरजिम्मेदार थे या उन्हे अपने बच्चों की फिक्र नहीं थी वे भी उतनी ही फिक्र करते थे जितनी आज पैरेंट्स करते हैं लेकिन का परवरिश करने का तरीका बिलकुल अलग हैं । इसलिए हमें परवरिश के पुराने तरीकों को पूरी तरीके से नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए |
  2. आज हर समय पैरेंट्स बच्चों को प्रोटेक्ट करने के लिए बैठे रहते हैं। बच्चों को कभी फ्री नहीं छोड़ा जाता । हर छोटी सी बात को लेकर चिंतित होते हैं |बच्चों को रत्ती भर भी चिंता महसूस नहीं होने देते फलस्वरूप बच्चे मानसिक रूप से मजबूत नहीं होते ।
  3. आज बच्चों और पैरेंट्स के मध्य दोस्ती वाला रिलेशन ज्यादा देखने को मिलता हैं । यार पापा , यार मम्मी जैसे शब्द ज्यादा सुनने को मिलते हैं । बच्चों को दोस्त तो कई मिल जाएँगे लेकिन पैरेंट्स नहीं मिल पाएंगे । अतः इस रिलेशन को इंप्रूव करें और बच्चों से दोस्ताना व्यवहार ही करें |
  4. आज हर पैरेंट्स सामजिक प्रतिष्ठा और नाम के लिए बच्चों को अच्छी स्कूल मे भेजते हैं । बच्चे अच्छे मार्क्स प्राप्त करते हैं तो सोशियल मीडिया पर पोस्ट करते हैं और यदि कम मार्क्स आए तो प्रेशराइज करते हैं । आज पैरेंट्स बच्चों की नेचुरल क्षमता को इग्नोर करके उम्मीदों का बोझ डालते हैं । ऐसा करना बच्चे के साथ अन्याय करने जैसा है |

बच्चों की परवरिश इंप्रूव कैसे हो

  1. बच्चों के परिणाम नहीं प्रयास देखें ।
  2. बच्चों को प्यार का एहसास कराएं ।
  3. बच्चों को प्रेशराइज करने के बजाय उन्हे प्रोत्साहित करें ।
  4. माता पिता दोनों को बच्चों की जिम्मेदारियाँ शेयर करनी चाहिए एक अकेले पर इसका बोझ नहीं होना चाहिये ताकि जिम्मेदारिया पूरी करने मे परेशानी ना आए ।
  5. अपनी आर्थिक स्थिति बच्चों ओर वाईफ के सामने व्यक्त करे ताकि फिजूल खर्ची ना हो ।
  6. मोबाइल , टीवी आदि को छोड़कर सभी सदस्य एक साथ भोजन ग्रहण करे ।
  7. बच्चों को अपना रास्ता खुद चुनने दे । उन्हे क्या बनना हैं स्वयं तय करने दे । उनकी रुचि के अनुरूप उनके कैरियर का चुनाव स्वयं  बच्चे को करने दें ।
  8. बच्चे की हर इच्छा पूरी करना जरूरी नहीं है । हमेशा इच्छाए जिद मे बदल जाती हैं और जिद मे बच्चे गलत कदम उठाने तक से नहीं चूकते । बहुत से पैरेंट्स ये मानते हैं की हम बच्चों से बहुत प्यार करते हैं उनकी हर इच्छा हम पूरी करें ये हमारा फर्ज हैं लेकिन इस प्रकार वे गलती कर रहे होते है |
  9. छोटी उम्र मे ही बच्चों को कई प्रकार की जिम्मेदारिया सौपने से उनका बचपन कहीं खो जाता हैं । ज़िम्मेदारी पूरी नहीं होने पर वे अंडरप्रेशर भी हो जाते हैं और कभी कभी गलत कदम भी उठा लेते   हैं ।
  10. किसी भी प्रकार से बच्चों की किसी भी चीज मे इंटरफेयर ना   करे जब तक कि बच्चे गलत रास्ते पर ना चलना शुरू कर दे | इस जगह उन्हे सही राह दिखाये ।

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