बात करने का जादुई तरीका !!

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दोस्तों क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप जब किसी से मिलते है तो discussion शुरू होने के बाद ही और सुनाओ या और बताओ जैसे words पर आ कर आपकी गाड़ी अटक जाती है | और यदि आपका जवाब हाँ है तो विडियो आपके लिए है क्योकि आज हम बात करने जा रहे है कम्युनिकेशन के उन तरीकों को जो आपके जीवन को पूरी तरह से बदल देंगे और यदि आप ये तरीके सीख जाते है तो आपको गारंटी से तीन main benefitsहोंगे –

  1. आप बात करने के expert बन जाओगे |
  2. आप बहुत ही confident बन जाओगे |
  3. और इसके बाद आप कभी भी किसी को “और सुनाओ” “और बताओ “ जैसे बोरिंग वर्ड्स नहीं बोलोगे |

तो दोस्तों बिना समय बेकार किये हम बात करते उन सभी टेक्निक्स की जो आपको पूरी तरीके से बदल के रख देगी | सबसे पहली तकनीक है –

1. Quality:
यह सुनने में बहुत साधारण सा लगता है लेकिन ऐसा है नहीं क्योकि एक अच्छा कन्वर्सेशन depend करता है उसकी क्वालिटी पर इसलिए हमेशा कोशिश करें कि जब भी आप बोलें  तो अपने कन्वर्सेशन में से सभी बेकार और बिना वज़ह के शब्द निकल दे |जैसे कि आ…उ…. hamm… normaly,actually और बहुत से लोग बात करते समय you know जैसे शब्द बहुत काम में लेते है |  ऐसे वर्ड्स कम्युनिकेशन में कोई value ऐड नहीं करते है और इनको अपने कम्युनिकेशन में यूज़ करने का कोई मतलब नहीं है | for example- इस पैराग्राफ को ध्यान से देखिये –
वीकेंड्स पर आप क्या करते हो ?
आ आ.. वीकेंड्स पर मैं सुबहलेट उठता हूँ… और normally घूमने के लिए जाता हूँ..you know..घूमना सेहत के लिए अच्छा होता है ना……then शाम को aaaaa…actuallyfamily के साथ बाहर जाना होता है तो जाता हूँ..aaa..you know weekendsपर हम aaa…really बहुत एंजॉय करते है |इसको अब आप इस से compare करों-
वीकेंड्स पर आप क्या करते हो ?
 
 
वीकेंड्स पर मैं सुबह लेट उठता हूँ और फिर घूमने के लिए जाता हूँ क्योकि घूमना सेहत के लिए अच्छा होता है | शाम कोfamily के साथ बाहर जाता हूँ |weekendsपर हम really बहुत एंजॉय करते है |
आपने देखा कि सेकंड कन्वर्सेशन काफ़ी शोर्ट है लेकिन जो इनफार्मेशन convey की गयी है वो बिलकुल सटीक और पूरी है बल्कि ये कन्वर्सेशन ज्यादा sincere और confident लग रहा है | लेकिन अभी भी इस कन्वर्सेशन में एक कमी है जिसको दूर करने के लिए हम सीखते है हमारी technique नंबर 2 –

2.  Pauses :
जब भी आप अपनी बात को थोड़ा शोर्ट pause दे कर बोलते है है तो ये इसमें चार चाँद लगा देता है और आपके कन्वर्सेशन को बहुत effective बनता है |for example: हम same sentence को फिर से pauses के बिना और pauses के साथ बोल के देखते है |
वीकेंड्स पर मैं सुबह लेट उठता हूँ और फिर घूमने के लिए जाता हूँ क्योकि घूमना सेहत के लिए अच्छा होता है | शाम कोfamily के साथ बाहर जाता हूँ |weekendsपर हम really बहुत एंजॉय करते है |
तो देखा आपने कि ये है अंतर एक effective और ordinary कम्युनिकेशन में | सही समय पर और सही तरीके से लिया गया हर pause आपके कम्युनिकेशन को impressive बना देता है |

3.  Statements :
हमारी तीसरी technique है statements- एक common mistake जो most of लोग करते है वो है कि वे सामने वाले person से question पर question पूछ कर उसे डरा देते है, जैसे कि वो उनका इंटरव्यू ले रहे हो | ये गलती आप कभी भूल कर भी ना करें | क्योकि अगर आप सिर्फ question पूछोगे और अपने बारे में कुछ नहीं बताओगे तो ये एक डरावना वन साइडेड कम्युनिकेशन हो जायेगा और सामने वाला आप से जल्द से जल्द पीछा छुड़ाना चाहेगा इसलिए सवाल पे सवाल करने की बजाय statements का यूज़ करें | हम आपको 2 तरह की स्टेटमेंट technique बता रहे है जो आप अपने सवालों की जगह उसे कर सकते है –
A. Cold Read statement: इसमें आपको सामने वाले को देखकर उसके बारे में अंदाज़ा लगाना है और उसके बारे में ही बात करनी है | for example यदि आप किसी से पूछना चाहते है की आपकी hobbies क्या है तो पहला तरीका तो ये हुआ की आप उनसे directly पूछ ले कि आपकी hobbies क्या है या आप इसे statement फॉर्म में ऐसे कहे –
“ आप काफी interesting person लगते है…मैं दावे से कह सकता हूँ कि आपकी hobbis भी काफी interesting होंगी “
 
अगर आपका अंदाज़ा गलत है तो वो आपको correct  और बोलेंगे कि “कहाँ यार, मैं कहाँ interesting हूँ…मैं तो एक साधारण सा आदमी हूँ “ या वो आपको पूछेगा कि आपको क्यों लगता है कि मैं interesting हूँ ? लेकिन यदि आप सही निकले तो आपके और उनके बीच एक बहुत अच्छी bonding बन जायेगी और वो भी हैरानी से पूछेंगे की मेरी interesting hobbies है आपको है…आपको कैसे पता ?
 
cold read statement ज्योतिष भी यूज़ करते है…आपका हाथ देखकर कहेंगे कि बेटा तुमको जल्दी गुस्सा आता है और आप कहते है कि बाबा आपको कैसे पता ? लकीरे कह रही है बेटा और तो और तुम्हे आज तक बहुत कम लोगों ने जाना है क्योकि तुम बहुत से बातें दूसरों कोबुरा ना लग जाए इसलिए नहीं कहते हो | आपको ये बाते अपने लिए बिलकुल सही लगती है और आप बाबा के पैरो में गिर जाते है | कभी भी इस टाइप के बेकार झांसो में ना आये क्योकि ये सिर्फ cold statements है | इन्हें mostly ज्योतिष और साइकोलोजिस्ट यूज़ करते है | आमने वाले के बारे में अंदाज़े लगाइए..अगर आप गलत है तो वो आपको correct करेगा और अगर आप सही है तो आपके और उसके बीच एक अच्छा कनेक्शन बन जाएगा |
B. Story statements : अगर आपको किसी से पूछना है कि उसको किस चीज़ से डर लगता है ? तो ये एक बहुत सिंपल और बोरिंग तरीका हो गया बात करने का जिसमे आपने अपनी कोई इनफार्मेशन नहीं की लेकीन यदि आप स्टोरी statement के थ्रू ये ही चीज़ पूछेंगे तो आप इसे ऐसे कहेंगे –
बचपन में मुझे अंधरे से बहुत डर लगता था | मैं अपने आप को रजाई में कसकर छुपा लेता था ताकि कोई भूत मुझे पकड़ ना सके | यहाँ पर आपके एक स्टोरी सुनाई जिसमे से सामने वाला कई topics निकल सकता है लिखे अँधेरा, बचपन , भूत etc और साथ ही वो अपने experience बता सकता है |इसीलिए सिंपल question पूछने की बजाय statements यूज़ करें, इस से ज्यादा अच्छा कनेक्शन बनता है |
चलिए अब बात करते है कम्युनिकेशन की technique नंबर 4 जो कि इतनी effective है कि अगर अपने इसे सीख लिया तो आप जीवन में कभी और सुनाओ और बताओ जैसे बोरिंग शब्दों का यूज़ नहीं करेंगे –

4. conversational threading :
एक नॉर्मल conversation कितना मज़ेदार होता है आइये सुनिए-
आप कहा से हो ?
मैं दिल्ली से हूँ |
ओहह गुड,आप कहाँ से हों ?
मैं जयपुर से हूँ॥
ग्रेट, और सुनाओ ?
सब बढ़िया…. आप सुनाओ ?
बस यही जाकर आपका conversation मर जाता है |conversation threading दो तरीके से काम करती है |
पहली की जब भी आप कुछ बोलो तो सामने वाले को इतनी इन्फॉर्मेशन दो की वो इसमे से कुछ टॉपिक निकाल कर आप से बात कर सके यानि की ये एक स्टोरी फ़ारमैट मे होनी चाहिए |
और दूसरी ये कि सामने वाला जो कुछ भी बोल रहा है आप उसमे से टॉपिक निकाल कर कुछ बोले | जब भी हम बोलते है तो हमारे sentences कई सारे topics होते है जिन पर हम ध्यान ही नहीं देते है | अगर इस conversation मे “ मैं दिल्ली से हूँ” कि जगह ये कहा जाय कि “वैसे तो मैं दिल्ली से हूँ लेकिन मुझे छोटे शहर में रहना पसंद है क्योकि मुझे ज्यादा भीड़ भाड़ पसंद नहीं है” | इस sentenceमें से कई बातें शुरू की जा सकती है जैसे की दिल्ली…छोटा शहर…भीड़ भाड़ वगैरह वगैरह | आप उस personसे अपने दिल्ली ट्रिप के बारे में बात कर सकते है…छोटे शहर के अनुभव के बारे मे बात कर सकते है….भीड़ भाड़ पर अपनी राय रख सकते है…या जब कभी traffic में फंस गए थे तो अपना experience बता सकते है |
दूसरी तरफ आगर सामने वाला सिर्फ इतना सा कह रहा है कि वो दिल्ली से है तो आप अपनी तरफ से अच्छी इन्फॉर्मेशन दे सकते है जैसे कि मैं जयपुर से हूँ जो कि पिंकसिटि के नाम से भी फ़ेमस है | जयपुर में ना सिर्फ साफ सुथरा और एक अच्छा शहर है बल्कि यहाँ पर हवामहल और आमेर का किला जैसी कई सुंदर जगह है | इस टाइप के जवाब से सामने वाले का आप में interest बढ़ता है तो और वो आप से और अच्छे से बात कर पाता है |
एक और example से हम इस चीज़ को समझ सकते है-
अगर सामने वाला आप से पूछता है कि आप क्या करते है तो आप ये कह सकते है कि मैं एक कंपनी में चार्टेड अकाउंटेंट हूँ और अपनी financial advice से लोगों को फाइनेंसियल crisis से बचने में मदद करता हूँ | इस डिस्कशन में कई सारे टोपिक्स है जिन पर बात कि जा सकती है जैसे कि चार्टेड अकाउंटेंट,financial crisisऔर फाइनेंसियल advice वगैरह वगैरह |

ज़्यादातर cases में लोग अपने डिस्कशन में ऐसे topics ही नहीं देते जिस पर सामने वाला कुछ react कर सके जो कि वो बड़ी आसानी से दे सकते है | तो अब से जब भी आप किसी से बात करें तो उसी के discussion में से ही टोपिक्स निकालने कि कोशिश करें और उसी पर आगे बात कि जा सकती है | और अगर सामने वाले ने टोपिक्स नहीं दिये है तो आप अपने डिस्कशन में उसे टोपिक्स दे सकते हो |तो दोस्तों ये थी कम्युनिकेशन ki important techniques जिनके through आप अपने communication को काफी effective बना सकते है |

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