सहनशील कैसे बने ?

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सहनशीलता एक ऐसा गुण है  जिससे जीवन का वास्तविक विकास होता है। आज ज़्यादातर इंसान दुख और तनाव से ग्रस्त हैं। परिणामस्वरूप  वह थोड़े से कष्टों से शीघ्र घबरा जाता हैं, क्रोधित हो जाता हैं। जीवन में सहनशीलता का बहुत अधिक महत्व है। आज ये आवश्यक है कि हम सहनशील बनें ताकि हमारे कर्म और व्यवहार से कभी किसी को कष्ट न हो । सहनशीलता को प्रेक्टिस से सीखा जा सकता है। प्रत्येक कार्य की एक सुनिश्चित योजना बनाने और उसका अनुसरण कर सही दिशा में परिवर्तन कर सकते हैं । अच्छे लोगों की संगति, चिंतन व विचारों को शुद्ध बनाए रखने से समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त हो सकती है। आइये आज की इस पोस्ट के माध्यम से हम जानते है की हम कैसे एक सहनशील इंसान बन सकते है ?

सहनशील कैसे बन सकते है ?

  1. स्वयं की भावनाए सुधारे-

लोगो के प्रति नजरिया बदले अगर सभी को समान नजर से देखेंगे ,किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होगा , ऊंच नीच , अमीर गरीब सबके प्रति सम्मान की भावना रखेंगे तो किसी को कोई कष्ट नहीं होगा ।

  • ख़ुद को पहचाने –

सबसे पहले अपने अंदर झांक के देखे की हम क्या हैं , हमारा व्यवहार किस के प्रति कैसा हैं । जैसा हम चाहते है क्या हम भी दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार कर रहे हैं । कहा गया हैं “जैसी करनी वैसी भरनी” यानि जैसा हम करेंगे वैसा ही हमे भुगतना होगा । अतः दूसरों के साथ सही करें ताकि आप भी सही परिणाम प्राप्त कर सके ।

  • अपने ईगो लेवल को पहचाने –

कई बार लोग आपको लक्ष्य से भ्रमित करने की कोशिश करते हैं । कभी आपकी प्रोग्रैस से जलन करते हैं इस कारण मन मे तनाव उत्पन्न होने लग जाता हैं । आंतरिक तनाव इतना बढ़ जाता हैं की इससे ईगो हर्ट होता है और हम रिवेंज की सोचते हैं इसके लिए हम कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाते हैं । ये ही वो वक्त होता हैं जब हमारी सहनशीलता की परीक्षा होती हैं । अतः हमे अपने अहम की जांच करनी चाहिए ।

  • ध्यान करना शुरू करें –

ध्यान करने से सहनशीलता बढ़ती हैं किसी को भी तुरंत प्रतिक्रिया देने से पहले ये स्वयं परख कर क्या प्रतिक्रिया देनी हैं इसके बारे मे सिखाता हैं ।

  • नकारात्मक चीजों से दूर रहे –

जब हम परेशान होते हैं तो ही हमे सहनशीलता की आवश्यकता पड़ती हैं अतः उन सब चीजों को बदल डाले जो परेशान कर सकती है । हालांकि इन्हे बदलना थोड़ा कठिन हैं लेकिन हर चीज समय के साथ बदलती अवश्य है अतः इन्हे भी बदलने की कोशिश करे ।

  • सभी को खुश रखने की कोशिश ना करें –

कोई भी व्यक्ति अगर किसी चीज को लेकर हमसे नाराज हैं , हमारे प्रति उसका व्यवहार रूखा हैं तो हमे उसे बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए हमे उस पर ध्यान नहीं देना चाहिए उसे नजरंदाज करें ।

  • धैर्य रखे –

हमेशा धैर्य रखे इससे सहनशीलता बढ़ती हैं । कुछ बातों को इग्नोर करे और धैर्य रखे । अपनी एकाग्रता बढ़ाए इससे किसी भी गलत की तरफ ध्यान नहीं जा पाएगा हमेशा अच्छे ख्याल दिमाग मे आते रहेंगे ।  

  • गुस्से पर काबू रखे –

कभी भी गुस्सा नहीं करना चाहिए इससे सहन करने का गुण खत्म हो जाता हैं जिसकी हमे सबसे ज्यादा आवश्यकता होती हैं । अगर जल्दी गुस्सा आता हैं तो मेडिटेशन , योग आदि करें ।

  • हर असफलता कुछ सिखाती है –

हमे असफलता मे भी अच्छाई ढूंढनी चाहिए । ये चीज बहुत कम लोग कम कर पाते हैं क्योंकि हर आदमी असफल होने पर उसमे कमी को ढूँढने की कोशिश ही करते हैं । आखिर क्या कमी रह गयी , ये नहीं था , ये ज्यादा था , इसने ये किया , इसने नहीं किया आदि आदि । अच्छाई कोई नहीं ढूंढ पाता क्यों की उनमे धैर्य की कमी होती हैं ।

विनम्रता कभी ना खोये –

हमेशा शिष्टाचार रखे | कभी भी किसी से घृणा , ईर्ष्या ना  करे  और ना ही कभी हिंसा का ख्याल मन मे आना चाहिये ।

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