ख़ुद को कैसे बदलें ?

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बहुत कम लोग हैं जो अपने जीवन में संतुष्ट हैं या खुश हैं । यदि हमें  अपनी लाइफ बदलनी हैं तो सबसे पहले स्वयं को बदलना जरूरी हैं । यदि हम किसी काम मे सफल नहीं होते हैं तो दूसरों को दोष देते हैं , कमियाँ निकालते हैं, बहाने ढूंढते हैं ओर बाहरी चीजों को बदलते हैं । हमे बाहरी चीजों को बदलने के बजाए स्वयं को बदलना होता हैं ।हम अगर खुश रहना चाहते है तो दूसरों के अनुरूप स्वयं को ढालना होगा दूसरे आपके अनुसार नहीं बदलेंगे ।

1. दुनिया तब बदलेगी जब अपनी सोच बदलेंगे:

अपनी सोच ही है जो सही या गलत का निर्णय करती है । सोच यदि बदल जाती है तो चीजे अपने आप सही होने लगती है । आप हर चीज मे यदि खामी ढूँढेंगे तो कोई चीज आपके अनुसार सही नहीं लगेगी । यदि आप हर व्यक्ति मे कमी निकालते हैं और लोगों की अच्छाई के बजाय बुराई ढूंढते हैं तो वे आपके विरोधी हो जाएंगे ओर आप अकेले पड़ जाएंगे । यदि खुश रहना चाहते हैं तो अच्छाई को देखना और बुराई को इग्नोर करना सीखें ।

2. निरंतर प्रयास करें:

किसी काम मे लगातार असफल होते हैं तो हम हताश हो जाते हैं | जो प्रयास हम करते हैं उन्हे छोड़ देते हैं ओर काम वही रुक जाते हैं । जब तक किसी कार्य मे सफल नहीं हो जाते हैं हमे निरंतर प्रयास जारी रखने चाहिए और कभी भी उम्मीद नहीं खोनी चाहिए ।

3. गलती को स्वीकार करे ओर सुधार करे:

ऐसा कभी नहीं होता कि हम कोई कार्य करें ओर गलती ना हो। हम गलती भी करते हैं लेकिन कभी उसे स्वीकार नहीं करते हैं  और उस पर व्यर्थ मे बहस करते हैं । यदि गलती हो भी जाए तो उसे स्वीकार करना चाहिए । कभी भी गलती को दोहराना नहीं चाहिए ओर उसमे सुधार करके नये सिरे से काम को पूर्ण करना चाहिए ।

4. अच्छी आदते:

“सफल जीवन मतलब अच्छी आदतें” !! हमेशा बुरी आदतों से बचना चाहिए ओर अच्छी आदतों को अपनाना चाहिए । अच्छी आदते अच्छे विचारों का संचार करती है । अच्छे विचारों से सभी कार्यो मे सफलता हासिल होती हैं अतः हमेशा हर परिस्थिति मे अच्छी आदते अपनानी चाहिए ।

5. दूसरों पर निर्भर न रहें:

किसी भी कार्य की ज़िम्मेदारी यदि स्वयं की है तो उसे खुद पूरा करें किसी और पर निर्भर ना रहें । दूसरे के भरोसे कोई काम कभी पूरे नहीं होते | जब कार्य पूरे नहीं होते है तब हम दूसरों को दोष देते हैं| अगर कार्य पूरा करने की ज़िम्मेदारी स्वयं की हैं तो खुद ही उसे पूरा करे ।

6. पॉज़िटिव थिंकिंग:

किसी भी काम की शुरुआत सकारात्मक सोच के साथ करनी चाहिए | यदि सोच सकारात्मक होगी तो सभी काम बनेंगे और आगे बढ़कर अधिक कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी लेकिन यदि काम पूरा नहीं होता तो नकारात्मक्ता जन्म लेती है ओर सभी कार्य ओर योजनाए बाधित होती हैं | अतः हमेशा पॉज़िटिव थिंकिंग रखनी चाहिए ।

7. बुरी संगत से दूर रहे:

हमेशा बुरी संगत से दूर रहना चाहिए । जैसा की हम बचपन मे अपने बड़ो से सुनते थे की ये दोस्त अच्छे नहीं हैं इनके साथ नहीं रहना , ये आदत बुरी है इससे दूर रहे लेकिन हम इन बातों को नजरंदाज कर देते थे लेकिन अब हम बच्चे नहीं हैं, किसकी संगत मे हमे रहना हैं क्या अच्छा है क्या बुरा हम स्वयं सोच सकते हैं ।

8. नियमित ऐक्सर्साइज:

बिना शारीरिक श्रम के हम आलसी बन जाते हैं, कुछ करने की इच्छा मर जाती हैं। नियमित एक्सर्साइज़ से पूरे दिन एक ताजगी बनी रहती  हैं |अतः हमेशा प्रातः जल्दी उठ कर थोडा समय ऐक्सर्साइज को देना चाहिए।

9. माता पिता की सेवा:

माता पिता की सेवा मे जीवन का सारा सुख हैं । आज व्यस्त जीवन के चलते माता पिता के लिए हमारे पास समय नहीं होता हैं । कभी कभी तो माता पिता का तिरस्कार भी होता हैं , हमेशा कुछ समय माता पिता को भी देना चाहिए ताकि जीवन मे एक खुशी का अनुभव कर सके ।

10. सेवा भाव:

हमेशा असहाय व्यक्तियों की सेवा करनी चाहिए | जो निस्वार्थ भाव से किसी का भला करते हैं उनका आत्मविश्वास सदैव दूसरों से ज्यादा होता है और एक आनन्द की अनुभूति होती हैं अतः जब कभी मौका मिले सेवभाव से कभी भी पीछे नहीं हटना चाहिए ।

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