खुशहाल शादीशुदा जीवन कैसे जिए ?

1878 0

शादीशुदा जीवन को गृहस्थ जीवन भी कहा जाता है | ये सबसे मुश्किल जीवन होता है कई सारी जिम्मेदारियां निभाते हुए भी रिश्ते बनाए रखना, सबको खुश रखना, सबकी उम्मीदे पूरी करना बहुत ही मुश्किल होता है। फिर भी जीवन के सफर में हर कदम पर जो साथ देता है वो जीवनसाथी होता है । खुशहाल शादीशुदा जीवन को किस तरह जिए कि भविष्य में एक दूसरे के साथ सुखमय एवं प्रसन्नता से जीवन का सफर कटे और शिकायते जीवन का हिस्सा ना बने ।

छोटे छोटे नियम, आदतें, खुशियां ये सब मिलकर ही एक  खुशहाल  जीवन बनाता हैं । किन बातों का ध्यान रख कर शादीशुदा जीवन को खुशहाल बना सकते हैं-

  1. पूरा दिन अपने काम, ऑफिस या अन्य लोगो को देने के बाद एक ऐसा समय निकालना जरूरी हैं जिसमे अपने जीवनसाथी के साथ इसका हर एक क्षण बीता सके । आज डिजिटल गजेट हम पर इतना हावी हो चुके हैं की कोई जगह या ऐसा वक्त नहीं हे जब हम इसका उपयोग नहीं कर रहे हो । अतः कम से कम बेडरूम मे इसका प्रयोग ना करे ।
  2. अपने जीवन को खुशहाल बनाने की ज़िम्मेदारी आपकी और आपके जीवनसाथी दोनों की ही होती हैं । कभी भी घर परिवार , ऑफिस आदि किसी भी प्रकार की शिकायतों को जीवन मे हिस्सा कभी ना बनने दे ।
  3. हर व्यक्ति के जीवन मे पिछले सालों की कोई पुरानी यादे हो सकती हैं । पुरानी यादों को हमेशा जीवन से हमेशा दूर रखे क्योंकि गाड़े मुर्दे उखाड़ने से खुशहाल शादीशुदा जीवन मे तबाही मच सकती हैं ।
  4. शादीशुदा जीवन मे प्यार , रोमांस आदि सभी आवश्यक हैं कोई भी चीज इनमे से नहीं होने पर जीवन मे दरार पड़ सकती हैं । अतः जीवनसाथी के साथ प्यार, रोमांस आदि सभी के लिए समय और स्थान दे ।
  5. एक दूसरे को हमेशा माफ करना सीखे । क्षमा मांगने से कभी भी कोई छोटा या बड़ा नहीं होता है । पत्नी अर्धांगिनी कहलाती हैं यानि पुरुष ( पति ) का आधा अंग । शादीशुदा जीवन मे छोटी मोटी गलतियाँ होती रहती हैं | अगर हर छोटी गलती को दिल और दिमाग मे लेके बैठ गए तो जीवन मे कलह के सिवाय कुछ नहीं रहेगा ।
  6. कभी भी किसी दूसरे से तुलना नहीं करनी चाहिए । इससे मन मे हीन भावना आती हैं और मनमुटाव बढ़ जाता हैं ।
  7. शादीशुदा जीवन हमेशा प्यार और विश्वास की नाजूक डोर से बंधा होता हैं । कभी एक दूसरे का विश्वास ना तोड़े साथ ही एकदूसरे पर भरोसा करें । ताकि पूरा जीवन खुशहाल बना रहे ।
  8. केवल अपनी ही अपनी ना कहे अपने साथी की भी सुने । अच्छे श्रोता बनाना भी अपने आप मे एक उपलब्धि हैं । बाते सुनने की भी आदत डालनी चाहिए ।
  9. किसी भी बात पर अपनी तुरंत प्रतिक्रिया ना दे अगले को समझे । समझने के बाद बात सही हैं या गलत इसे जाने फिर शांति से   अपनी प्रतिक्रिया दे। कभी किसी बात पे गुस्सा ना करे ।
  10. अपना कोई भी निर्णय जबर्दस्ती नहीं थोपे । अगले की राय ले फिर आपसी मत के अनुसार निर्णय को लागू कर उसका दोनों पालन करे ।
  11. कभी भी किसी भी अवस्था मे अपशब्द का प्रयोग ना करें । जो भी दुख या खुशी जीवन मे आए उसे दोनों मिलकर बांटे ।

Begin typing your search above and press enter to search. Press ESC to cancel.

Back To Top