योग करना शुरू कैसे करें ?

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योग हमेशा से भारत की प्राचीन परंपरा का अमूल्य हिस्सा रहा है। योग करने से शारीरिक व मानसिक अनेक फायदे होते हैं। योग कोई धर्म नहीं है, यह जीने की एक कला हैं जिसका लक्ष्य हैं- स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन । योग क्या है, यह जानने के लिए हमें इसके मूल में जाना होगा। योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द ‘युज’ से हुई है, जिसका अर्थ जुड़ना है। योग के मूल रूप से दो अर्थ माने गए हैं, पहला- जुड़ना और दूसरा-समाधि। जब तक हम स्वयं से नहीं जुड़ पाते, तब तक समाधि के स्तर को प्राप्त करना मुश्किल होता है। यह सिर्फ व्यायाम भर नहीं है, बल्कि विज्ञान पर आधारित शारीरिक क्रिया है। इसमें मस्तिष्क, शरीर और आत्मा का एक-दूसरे से मिलन होता है। साथ ही मानव और प्रकृति के बीच एक सामंजस्य कायम होता है। यह जीवन को सही प्रकार से जीने का एक मार्ग है। गीता में भी श्रीकृष्ण ने कहा है कि योग: कर्मसु कौशलम यानी योग से कर्मों में कुशलता आती है।

योग के नियम

  1. योग हमे योग शिक्षक के निर्देशानुसार उनके सानिध्य मे करने चाहिए ।
  2. योग हमेशा सूर्योदय या सूर्यास्त के समय ही करना अनुकूल हैं ।
  3. योग करने से पहले स्नान क्ररना चाहिए ।
  4. योग हमेशा खाली पेट ही करने चाहिए ।
  5. योग करते समय आरामदायक वस्त्र धारण करने चाहिए ।
  6. योग के लिए एकांत एवं शांत माहौल का चुनाव करना चाहिए ।

आसन क्या है ?

सुविधापूर्वक एकाग्र और स्थिर होकर बैठने को आसन कहा जाता है।  आसन का अर्थ विशेष प्रकार से बैठना ।आसन मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं-

गतिशील आसन और स्थिर आसन ।  

वैसे तो योग के सभी प्रकार शरीर के लिए लाभदायक होते हैं लेकिन कुछ ऐसे आसन हैं जो शरीर के लिए बहुत जरूरी हैं इनका अभ्यास रोज करना चाहिए।  इन योगासनों के अभ्यास से आप तन और मन दोनों से स्वस्थ रह सकते हैं।  

  1. सर्वांगासन- इसके नियमित अभ्यास से थायराइड सक्रिय एवं स्वस्थ होता है।  साथ ही मोटापा, दुर्बलता,  लम्बाई मे वृद्धि एवं थकान आदि विकार दूर होते हैं।  यह आसन मोटापा कम करता हैं एवं विशेष ग्रंथियों को मजबूत बनाता है।  
  1. योगमुद्रासन- सुंदर दिखने वालों के लिए ये आसन बहुत ही लाभदायक है।  इसके नियमित अभ्यास से चेहरा सुन्दर, व मन एकाग्र होता है ।
  1. स्वस्तिकासन- इसके नियमित अभ्यास से पैरों का दर्द और पसीना आना दूर होता है।
  1. गोमुखासन- इस आसन के नियमित अभ्यास से अंडकोष वृद्धि एवं आंत्र वृद्धि एवं धातुरोग, बहुमूत्र एवं स्त्री रोगों में भी लाभकारी है।  ये आसन मनुष्य को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
  1. गोरक्षासन- इससे मांसपेशियो में रक्त संचार ठीक रूप से होता  हैं।  इन्द्रियों की चंचलता समाप्त कर मन में शांति प्रदान करता है ।
  1. अर्द्धमत्स्येन्द्रासन- मधुमेह एवं कमरदर्द में लाभकारी ये आसन मेरुदंड के पास की नसों और नाड़ियों में रक्त का संचार सुचारू रूप से चलाने में मदद करती है।  इसके अलावा पेट के विकारों के लिए, आंखों को बल प्रदान करने के लिए भी यह आसन फायदेमंद हैं।

स्वस्थ रहने के लिए योगासनों के साथ-साथ 3 प्राणायामों का अभ्यास भी करना चाहिए –

अनुलोम-विलोम प्राणायाम – इसे करने से शरीर की सम्पूर्ण नस और नाडियां शुद्ध होती हैं।  शरीर तेजस्वी एवं फुर्तीला बनता है।  भूख बढ़ती है और रक्त शुद्ध होता है।  

कपालभाति प्राणायाम- इसे करने से हृदय, फेफड़े एवं मष्तिष्क के रोग दूर होते हैं।  कफ, दमा, श्वास रोगों में लाभदायक है।  मोटापा, मधुमेह, कब्ज एवं अम्ल पित्त के रोग दूर होते हैं एवं मस्तिष्क और मुख मंडल का ओज बढ़ता है।

भ्रामरी प्राणायाम- इसके अभ्यास से वाणी तथा स्वर में मधुरता आती है।  ह्रदय रोग के लिए फायदेमंद है।  मन की चंचलता दूर होती है एवं मन एकाग्र होता है।  पेट के विकार खत्म होते हैं और उच्च रक्त चाप पर नियंत्रण में रहता है।


योगासन के लाभ :

  • अच्छा मूड : जीवन में आगे बढ़ने और सफलता हासिल करने के लिए आपके स्वभाव का अच्छा और सकारात्मक रहना जरूरी है। इस काम में योग आपकी मदद करता है। यकीन मानिए, जब आप योग करते हैं, तो आप अंदर से पूरी तरह सकारात्मक ऊर्जा से भर जाते हैं। इससे आपका मूड अच्छा होता है और दिनभर काम में मन लगा रहता है।
  • तनाव कम : तनाव हर किसी के लिए नुकसानदायक है। जो व्यक्ति तनाव में होता है, उसके लिए सामान्य जिंदगी जीना मुश्किल हो जाता है। तनाव से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता योग है। जब आप योग करेंगे, तो नई ऊर्जा से भर जाएंगे। इससे तनाव का कम होना स्वाभाविक है।
  • चिंता से छुटकारा : कहा जाता है चिंता चिता की जननी है। जो चिंता में डूबा उसका तनाव में जाना तय है। चिंता के कारण ह्रदय संबंधी बीमारियां तक हो सकती हैं। अगर आप भी ज्यादा चिंता में डूबे रहते हैं, तो आज से ही योग का सहारा लेना शुरू कर दें। योग से न सिर्फ आप मानसिक रूप से तमाम तरह के विकारों व नकारात्मक सोच से उबर पाएंगे, बल्कि जीवन को फिर से जीने और तमाम दुविधाओं का सामना करने की क्षमता पैदा हो जाएगी। विचलित मन शांत होता है और परम आनंद का सुख मिलता है।
  • दबाव का मुकाबला : कई बार ऑफिस और घर का काम इतना ज्यादा हो जाता है कि कोई भी मानसिक दबाव में आ सकता है। ऐसा अक्सर महिलाओं के साथ होता है। इस अवस्था में उनके लिए विभिन्न कामों के बीच संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। इससे बचने का एकमात्र उत्तम जरिया योग है। योग आपको हर तरह की स्थिति और दबाव से बाहर निकलने की शक्ति देता है। आप अंदर से प्रसन्न महसूस करेंगे।
  • निर्णय लेने की क्षमता : योग आपको मानसिक रूप से इस कदर मजबूत बनाता है कि आप जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने में सक्षम हो जाते हो। साथ ही विपरीत हालत में स्वयं को कैसे संतुलित बनाए रखना है।
  • एकाग्रता : नियमित रूप से योग करते रहने से आप इतने सक्षम हो जाते हैं कि अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए एकाग्रचित होकर काम करने लगते हो। इस दौरान मार्ग में आने वाली तमाम बाधाओं को भी आसानी से पार किया जा सकता है। वैसे भी कहा जाता है कि सफलता का मूल मंत्र काम के प्रति एकाग्रता है।
  • अच्छी याददाश्त : योग के जरिए मस्तिष्क की कार्यप्रणाली पर भी असर होता है। खासकर, छात्रों के लिए यह बेहद जरूरी है। परीक्षा के दौरान अपने मस्तिष्क को शांत रखना और बेहतर बनाना जरूरी है, ताकि वो जो भी पढ़ रहे हैं, उन्हें अच्छी तरह याद रहे।
  • बारीकियों पर नजर : अक्सर आप स्कूल, कॉलेज या फिर ऑफिस में ऐसे प्रोग्राम में जाते होंगे, जिनमें किसी विषय के बारे में विस्तार से बताया जाता है और यह आपके लिए जरूरी भी होता है। इस तरह के माहौल में अमूमन होता यह है कि आप कुछ समय तो एक्टिव रहते हैं, लेकिन धीरे-धीरे आपका ध्यान किसी और तरफ चला जाता है। इस प्रकार आप जरूरी बातों पर ध्यान नहीं दे पाते, लेकिन योग करने वाला व्यक्ति हर समय एक्टिव रहता है। वह हर बारीक से बारीक चीजों पर भी ध्यान रखता है।
  • जीवन में सकारात्मक विचार : योग करना हमेशा ऊर्जावान रहता है। जीवन को लेकर उसके विचार सकारात्मक होते हैं। वह जीवन को हर दिन नई ऊर्जा व जोश के साथ जीना पसंद करता है। वह जीवनभर ‘खुश रहो और दूसरों को खुश रखो’ इसी सिद्धांत का पालन करता है।

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